Swami Vivekananda Jayanti 2023 | स्वामी विवेकानंद जयंती कब मनाई जाती है?

By | जनवरी 11, 2023
Swami Vivekananda Jayanti

Swami Vivekananda Jayanti:- स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) एक भिक्षु और 19 वीं शताब्दी के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक नेताओं (Chief Spiritual Leaders) में से एक थे।विवेकानंद एक महान छात्र थे जो कम उम्र में आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित हो गए थे। वह 1881 में एक रहस्यवादी और आध्यात्मिक शिक्षक रामकृष्ण (Ramkrishna) से मिले, जो उनके गुरु बन गए। विवेकानंद ने 1886 में रामकृष्ण की मृत्यु के बाद एक भिक्षु (Monk) के रूप में India भर की यात्रा की, अपने गुरु की प्रेम, समर्पण और सभी की सेवा की शिक्षाओं को साझा किया।

Swami Vivekananda एक महान नेता थे और अक्सर इनकी जीवन पर हमे निबंध लिखने के लिए पूछ लिया जाता है, तो इस लेख के जरिए हम आपको स्वामी विवेकानंद जयंती के ऊपर निबंध प्रस्तुत करेंगे। इस निबंध में 1. स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) स्वामी विवेकानंद जयंती कब है (When is Swami Vivekananda Jayanti), स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय) Swami Vivekananda Jayanti life Description), स्वामी विवेकानंद कैसे मनाई जाती है (How Swami Vivekananda Jayanti is celebrated) इन सभी बिंदूओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। स्वामी विवेकानंद जयंती (Swami Vivekananda Jayanti) के बारे में सब कुछ जानने के लिए इस लेख को अंत तक पढ़े।

Swami Vivekananda Jayanti 2023

Swami VivekanandaSimilar Content
स्वामी विवेकानंद जयंतीक्लिक करें
स्वामी विवेकानंद पर निबंध हिंदी मेंक्लिक करें
स्वामी विवेकानंद कोट्स हिंदी मेंक्लिक करें
स्वामी विवेकानंद के विचारक्लिक करें
स्वामी विवेकानंद का भाषणक्लिक करें
स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचयक्लिक करें
राष्ट्रीय युवा दिवस निबंधक्लिक करें
राष्ट्रीय युवा दिवस पर भाषणक्लिक करें
राष्ट्रीय युवा दिवसक्लिक करें

स्वामी विवेकानंद जयंती कब है?

हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती (Swami Vivekananda Jayanti)  राष्ट्रीय युवा दिवस  (National Youth Day)के रूप में मनाई जाती है। यह दिन देश के युवाओं और नौजवानों को समर्पित होता है, जिससे वे देश के भविष्य को बेहतर और स्वस्थ बनाने की क्षमता रखते हैं। 12 जनवरी को ही स्वामी जी का जन्म हुआ था, इसी कारण इस दिन युवा दिवस (National Youth Day) का आयोजन किया जाता है। 

READ  शिव रात्रि क्यों मनाई जाती हैं? | महाशिवरात्रि मानाने के पीछे वैज्ञानिक, आध्यात्मिक महत्व | Shivratri 2023

Swami Vivekananda Anniversary 2023

टाइटलस्वामी विवेकानंद जयंती 
लेख टाइपआर्टिकल
साल2023
2023 स्वामी विवेकानंद की कौन सी जयंती है38 वीं
स्वामी विवेकानंद जयंती कब है12 जनवरी
स्वामी विवेकानंद ने कब साधु जीवन अपनाया25 साल की उम्र में
स्वामी विवेकानंद जयंती की शुरुआत कब हुई1985
स्वामी विवेकानंद जन्म स्थानकोलाता
स्वामी विवेकानंद की मृत्यु4 जुलाई 1902
मृत्यु के वक्त स्वामी विवेकानंद की उम्र39 वर्ष

स्वामी विवेकानंद कौन थे? | Who is Swami Vivekananda

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता (Kolkata) में हुआ था। इनको पहले नरेंद्रनाथ दत्त (Narendra Dutta) के नाम से जाना जाता था। वे वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरू थे। उनके अंदर छोटी उम्र से ही अध्यात्म में रुचि रहती थी। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद जब वे 25 वर्ष के हुए तो उन्होंने अपने गुरू से प्रभावित होकर सांसारिक मोह से त्याग करके संयासी हो गए। सन्यास लेने के बाद नरेंद्रनाथ का नाम विवेकानंद (Swami Vivekananda)  पड़ गया था। रामकृष्ण परमहंस (Ramkrishna Paramhans) से 1881 में विवेकानंद की मुलाकात हुई थी ।

पूरी दुनिया में ‘हिंदूधर्म’ का स्थान बनाने और इसके महत्व को बताने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है ।स्वामी जी ने India में आध्यात्मिक उत्थान के लिए बहुत काम किया । स्वामी जी ने पश्चिमी देशों में वेदांत फिलोसिफी (Vedant Philosophy) को फैलाया । विवेकानंद ने गरीबों की सेवा के लिए “रामकृष्ण मिशन” की स्थापना की थी । उन्होंने देश के युवाओं में प्रगति करने के लिेए नया जोश और उत्साह भर दिया था। वे एक देशभक्त संत के रूप में जाने जाते हैं, इसलिए उनके जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। 

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय | Swami Vivekananda Biography

स्वामी विवेकानंद का परिवार 

READ  Parakram Diwas Essay in Hindi 2023 | पराक्रम दिवस पर निबंध हिंदी में

नरेंद्र का जन्म ब्रिटिश राज (British Government) में कलकत्ता शहर (kolkata city) में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन हुआ था । वे एक पारंपरिक बंगाली परिवार से थे और कुल 9 भाई-बहन थे । नरेंद्र के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था, वे कलकत्ता उच्च न्यायालय में अभिवक्ता (Lawyer) थे । उनकी माता का नाम भुवनेश्वरी देवी एक धार्मिक और घरेलू महिला थी । स्वामी जी के दादाजी संस्कृत और फारसी के विद्वान थे । उनके घर में धार्मिक माहौल पहले से ही रहा था, जिसका प्रभाव स्वामी जी पर भी हुआ और उन्हें उच्च व्यक्तित्व बनाया । 

नरेंद्र का बचपन और उनसे जुड़े किस्से

जब नरेंद्र छोटे थे, तब वे बहुत शरारती हुआ करते थे । वे पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूंद में भी अव्वल थे । स्वामी जी कम उम्र से ही ध्यान करते थे । बचपन से ही वे ईश्वर के बारे में कई रीति- रिवाजों और जातिवाद के बारे में प्रश्न किया करते थे । बचपन से ही Narendra के मन में सन्यासियों के प्रति काफी श्रध्दा थी । अगर कोई फकीर या संयासी उनसे कुछ मांगता था और उनके पास वो चीज होती थी, तो वे तुरंत उसे दे देते थे। नरेंद्र बचपन से ही भले स्वभाव वाले थे, उतने ही शरारती भी थे । उनकी मां भगवान शिव (Lord Shiva) से एक बालक देने की प्रार्थना करती थीं और उन्होंने यह प्रार्थना स्वीकार करने अपना किसी भूत को भेज दिया ऐसा वे कहा करती थीं। 

 स्वामी जी की शिक्षा

सन 1871 में जब नरेंद्र 8 साल के थे, तब उनका एडमिशन ईश्वरचंद्र विद्यासागर ( Ishwar Chandra Vidyasagar) के मेट्रोपोलियन इंस्टिट्यूशन (Metropolitan Institution) में हुआ था। उन्होंने यहां पर 1877 तक शिक्षा ग्रहण की । सन 1877-79 तक वे परिवार के साथ Raipur में रहे और इसी साल कलकत्ता लौट आए । सन 1879 में नरेंद्र ने अपनी मेट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया । एक साल बाद उन्होंने Kolkata के स्कॉटिश चर्च कॉलेज में दाखिला लिया और फिलोसिफी पढ़ना शुरु किया । यहां उन्होंने पश्चिमी तर्क, पश्चिमी फिलोसफी और यूरोपियन देशों के इतिहास के बारे में जानकारी ली । नरेंद्र को हिंदू धर्म ग्रंथों, वेदों, उपनिषदों, श्रीमद् भगवद गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों में बेहद रुचि थी। उनकी अच्छी याददाश्त की वजह से कुछ लोग उन्हें ‘श्रुतधारा’ भी कहते थे । 

READ  New year Poem in Hindi | न्यू ईयर पर कविता हिंदी में

स्वामी विवेकानंद की जयंती युवा दिवस क्यों मनाते हैं ? 

स्वामी जी को ऑलराउंडर कहा जाता है। वह दर्शन, कला, धर्म, इतिहास, साहित्य और सामाजिक विज्ञान के विद्वान थे। शिक्षा में अच्छे होने के साथ-सा उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत (Indian Classical Music) का भी ज्ञान था । Swami Vivekananda  एक अच्छे खिलाड़ी भी थे, वे युवा तो थे ही, जिस वजह से उनके अंदर काफी स्फूर्ति थी। उन्होंने कई मौकों पर अपने अनमोल विचारों और प्रेरणादायक वचनों से युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया । इसी वजह के चलते Swami Vivekananda  जी की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है ।

राष्ट्रीय युवा दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई  ?

Swami Vivekananda के जन्मदिन को युवाओं के लिए समर्पित युवा दिवस की शुरुआत 1984 में हुई थी । उन दिनों भारत सरकार ने कहा था कि स्वामी विवेकानंद का दर्श्न, आदर्श और काम करने का तरीका भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्त्रोत हो सकता है। तब से Swami Vivekananda  की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के तौर पर मनाने की घोषणा कर दी गई । 

 स्वामी विवेकानंद जयंती कैसे मनाई जाती है ?

इस दिन India के हर एक स्कूल और विश्वविद्यालयों में Swami Vivekananda  के दिए गए भाषण और मोटिवेशनल स्पीच का आयोजन किया जाता है। हर सरकारी विभाग में उनकी फोटो और मूर्तियों पर माल्यार्पण करके इस दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवाओं को विवेकानंद जी के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है। उनके भाषण और मोटिवेशनल स्पीच से लोगों में एक नई चेतना का जागरण होता है। निराश व्यक्ति भी एक अलग तरह की ऊर्जा से भर जाता है। इस दिन स्कूल कॉलेजों में तरह-तरह के आयोजन किए जाते हैं। लोगों को वेदांत की दीक्षा दी जाती है।

FAQ’s Swami Vivekananda Jayanti

Q.स्वामी विवेकानंद कितने भाई-बहन थे ?

Ans. स्वामी जी 9 भाई-बहन थे।

Q.स्वामी विवेकानंद का जन्म किस परिवार में हुआ था ?

Ans. बंगाली परिवार में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था।

Q. युवा दिवस की शुरुआत कब से हुई ?

Ans. 1985 से युवा दिवस की शुरुआत हुई।

Q. साल 2023 में कौन सी वी स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई जाएगी ?

Ans. साल 2023 में 38वीं स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई जाएगी।

इस ब्लॉग पोस्ट पर आपका कीमती समय देने के लिए धन्यवाद। इसी प्रकार के बेहतरीन सूचनाप्रद एवं ज्ञानवर्धक लेख easyhindi.in पर पढ़ते रहने के लिए इस वेबसाइट को बुकमार्क कर सकते हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *