Saraswati Puja 2023 | जाने बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा कब व कैसे की जाती है।

By | दिसम्बर 23, 2022
Sarswati Puja

Saraswati Puja 2023:- नया साल शुरु होते ही देश भर में त्योहारों का सिलसिला शुरु हो जाएगा। जनवरी (January) की शुरुआत में  ही देश भर में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। वहीं इसके कुछ दिन बाद सरस्वती पूजा (Saraswati Puja) यानी कि वसंत पंचमी (Vasant Panchami) की धूम देखते ही बनेगी। कई लोगों का सवाल होगा कि Vasant Panchami कौन सी तारीख को पड़ेगी, तो हम इस लेख के जरिए वसंत पंचमी की तारिख के बारे में तो बताएंगे ही, इसके साथ ही हम आपने पाठको को Saraswati Puja कब है आएगी, 2023 में सरस्वती पूजा कब है, सरस्वती पूजा मुहूर्त, सरस्वती पूजा विधि के बारे में बताएंगे।

इसके साथ ही सरस्वती पूजा के महत्व के बारे में भी हम आपने पाठको को जानकारी देंगे। वहीं Saraswati Puja 2023 Date के लाभ के बारे में भी पाठकों को बताएंगे। इस लेख के जरिए आपको सरस्वती पूजा से जुड़े हर सवाल के जवाब मिलेंगे। वहीं सरस्वती पूजा के जूड़ी छोटी से छोटी और बड़ी सी बड़ी जानकारी को जानने के लिए इस लेख को जरुर पढ़े।

सरस्वती पूजा 2023

टाइटससरस्वती पूजा
लेख प्रकारआर्टिकल
साल2023
साल 2023 सरस्वती पूजा कब है26 जनवरी
सरस्वती पूजा दिनगुरुवार
सरस्वती पूजा मुहूर्तसुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक
साल 2022 सरस्वती पूजा5 फरवरी
सरस्वती पूजा का महत्वमाता सरस्वती का जन्म दिवस
सरस्वती माता किस को सौरुप हैमाता दुर्गा का

Saraswati Puja 2023

माता सरस्वती (Goddesses Saraswati) की वंदना और आराधना वाले दिन को सरस्वती पूजा कहते है। Saraswati Puja को Vasant Panchami और श्रीपंचमी भी कहते है। माता सरस्वती ज्ञान और कला संस्कृति की देवी है। Goddesses Saraswati के आशीर्वाद की इच्छा हर विद्यार्थी और कलाकार रखता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति माता सरस्वती की आराधना कर उनके आशीर्वाद को पाता है वह हमेशा सफलता प्राप्त करता है। वहीं Vasant Panchami के दिन सरस्वती पूजा कार्यक्रम हर Schools में रखा जाता है। वहीं वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा करना बहुत ही लाभदायक और फलदायक होता है। वसंत पंचमी यानी कि सरस्वती पूजा के दिन को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है।

कहा जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती की उतपत्ति हुई थी। वसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्म दिवस को तौर पर भी मनाया जाता है, याहि कारण है जो इस दिन सरस्वती पूजा की जाती है। सरस्वती पूजा की धूम पूरे देश में देखते ही बनती है। देश के अधिकतर शिक्षण संस्थानों (Educational Institutions) में सरस्वती पूजा रखी जाती है, वहीं इस दिन संस्कृतिक कार्यक्राम (Cultural Programs) का आयोजन भी किया जाता है।

सरस्वती पूजा कब है? Saraswati Puja 2023 Date

हिंदू कलेंडर के हिसाब माघ माह के शुक्ल पक्ष के पाचवें दिन देश भर में Saraswati Puja की जाती है। सरस्वती पूजा हर साल January के अंत में या तो February की शुरुआत में आती है। वैसे तो सरस्वती पूजा देश भर में धूमधाम से मनाई जाती है पर इस दिन पश्चिम बंगाल (West Bengal) में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। सरस्वती पूजा को वसंत पंचमी भी कहते है। वसंत पंचमी वसंत त्र्रतु के पहले दिन पड़ती है। सरस्वती पूजा के दिन ज्ञान, कला और वाणी की देवी मां सरस्वती की बड़े ही धूमधाम से पूजा की जाती है। सभी विद्यार्थियों  के लिए ये दिन बड़ा ही खास होता है। गौरतलब  है कि Saraswati Puja के दिन बच्चों की पढ़ाई शुरु कराने या अक्षर ज्ञान शुरु कराने की परंपरा है।

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Vasant Panchami के दिन ही माता सरस्वती ब्रह्मांड को रचने वाले ब्रह्म देव (God Brahma) के मुख से अवतरित हुई थी। ऐसा माना जाता है कि ये दिन मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए बहुत खास है। माता सरस्वती की इस दिन पूजा करने से वह जल्दी प्रसन्न हो जाती है और अपने भक्तों पर अपनी मैहर बनाएं रखती है।

 2023 में सरस्वती पूजा कब है? When is Saraswati Pooja in 2023

जैसे की हम आपको बता ही चुके है कि वंसत पंचमी को ही सरस्वती पूजा कहा जाता है और ये त्यौहार बड़े ही धूमधाम से पूरे India में मनाया जाता है। सरस्वती पूजा हर Hindu Calendar के हिसाब से माघ माह की शुल्क पक्ष के पांचवें दिन मनाई जाती है। ये हर साल जनवरी के अंत में या तो फरवरी की शुरुआत में मनाई जाती है। साल 2022 में सरस्वती पूजा 5 फरवरी के दिन मनाई गई थी, वहीं साल 2023 में ये 26 जनवरी के दिन मनाई जाएगी। वैसे इस साल Saraswati Pooja दो दिन मनाई जाएगी। कुछ केलेंडर के हिसाब से सरस्वती पूजा 25 जनवरी को है वहीं कुछ के हिसाब से 26 जनवरी को है। गौरतलब है कि Basant Panchami के दिन सभी लोग माता सरस्वती की पूजा करते है,

आपको बता दें कि माता सरस्वती को श्वेता के नाम से भी जाना जाता है, वहीं माता सरस्वती देवी दुर्गा का ही एक रुप का प्रतीक मानी जाती है। माता सरस्वती को सफेद वस्त्रों को धारण किए गुणी, शांत और शिष्ट महिला की प्रतिमूर्ति कहा जाता है। माता सरस्वती ज्ञान और कला के साथ ही सूचना, संस्कृति, अभिव्यक्ति, सीखने की देवी कहा जाता है। माता सरस्वती हंस की सवारी करती है।

सरस्वती पूजा मुहूर्त | Saraswati Puja Mahurat

Hindus में पूजा का मुहूर्त अति आवाश्यक होता है। बीना मुहूर्त के Hindu’s Worship की शुरुआत नहीं करते है। ऐसा मानना है कि पूजा के लिए शुभ मुहूर्त को होना बहुत जरुरी है। बिन मुहूर्त के पूजा करने से भगवान प्रसन्न नहीं होते है। यही कारण है जो रक्षाबंधन (Rakshabandhan) से लेकर दिवाली (Diwali), मकर संक्रांति (Makar Sankranti) से लेकर होली (Holi) सभी त्योहारों में पूजा का मुहूर्त निर्धारित होता है और लोग इसी समय अपने ईश्वर की पूजा कर के उन्हें प्रसन्न करते है और उनका आशीर्वाद पाते है। इस कड़ी से अलग सरस्वती पूजा के दिन शुभ पूजा मुहूर्त को नहीं देखा जाता है, क्योंकि ये पूरा दिन ही बहुत शुभ होता है। जैसे कि हम सब जानते है कि इस दिन Goddesses Saraswati की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया जाता है।

देश में सभी Schools और Educational Institutions में सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाएगा। आपको बता दें कि 26 जनवरी को पढ़ने वाली सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर शुरु हो जाएगा औऱ ये दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। आपको एक जरुरी बात बता दें कि Vasant Panchami यानी कि सरस्वती पूजा के दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है यानि की इस दिन मुहूर्त देखने की जरुरत नहीं होती है। वसंत पंचमी काफी शुभ दिन माना जाता है यही कारण है जो इस दिन बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।

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सरस्वती पूजा विधि | Saraswati Puja Vidhi

पूरे देशभर में Vasant Panchami के दिन को बहुत शुभ माना जाता है। जो लोग नया काम शुरू करना चाह रहे हैं या फिर शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया करना चाह रहे हैं उनके लिए यह दिन बहुत शुभ (Auspicious) है। बसंत पंचमी को Saraswati Puja भी कहा जाता है। इस दिन मां सरस्वती जी की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है और उनसे आशीर्वाद पाया जाता है।Saraswati Puja के दिन किसी भी तरह के शुभ मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि यह पूरा ही दिन बहुत शुभ होता है। सरस्वती पूजा की विधि किस प्रकार है इसके बारे में हम आपको अवगत कराएंगे।

Saraswati Puja Vidhi

  • Saraswati Puja के दिन भक्तों को चाहिए की वह सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें
  • इसके बाद जहां वह पूजा करेंगे उस स्थान को अच्छी तरह साफ कर लें
  • इसके बाद आपको Goddesses Saraswati की प्रतिमा या तस्वीर को सामने रखकर उनके सामने धूप दीप और अगरबत्ती जलानी है। इसके बाद आप Worship शुरू करेंगे।
  • शुद्धि और आचमन करने के बाद चंदन लगाना है इसके साथ ही आपको संकल्प लेना है क्योंकि बिना संकल्प के पूजा पूरी नहीं होती। वही हाथ में तिल फूल अक्षत मिठाई और फल लेकर Goddesses Saraswati को चढ़ाने हैं, वहीं इसके बाद गणपति जी (Lord Ganesha) की भी पूजा करनी है।
  • बिना Lord Ganesha की पूजा किए कोई भी पूजा पूरी नहीं होती। उसी तरह Saraswati Puja भी अधूरी है। हाथ में फूल लेकर गणपति जी का ध्यान करना है। वहीं God Ganesha पर चंदन लगाकर उन्हें फूल समर्पित करना है और उन्हें प्रसाद का भोग लगाना है।
  • वही कलश की पूजा करना भी सरस्वती पूजा के दिन बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको घडे या लोटे पर मोली बांधनी है और उस कलश के ऊपर आम के पत्ते रखने हैं । कलश के अंदर आप सुपारी, दूर्वा, अक्षत और मुद्रा रखें। वही कलश के गले में मौली बांदे और उसके के ऊपर नारियल रखें, लेकिन ध्यान रखें कि नारियल को पहले वस्त्र से लपेट लें, उसके बाद ही कलश पर रखें। हाथ में फूल और अक्षत लेकर वरुण देवता का कलश में आवाहन करें।

पूजा के बाद Goddesses Saraswati पर प्रसाद अर्पित करें इसके बाद एक फूल लेकर उसमें चंदन और अक्षत लगाकर कॉपी किताब पर रखें। पूजा के बाद मां सरस्वती के नाम का हवन करें। जिसके लिए भूमि को साफ करके हवन कुंड बनाए। 

  • आम की अग्नि को प्रचलित करें। हवन की बभुत को माथे पर लगाएं। श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण करें और इसे सभी के साथ बाटें।
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सरस्वती पूजा का महत्व | Importance of Saraswati Pooja

सरस्वती पूजा का महत्व पौराणिक एवं ऐतिहासिक (Mythological and Historical) दोनों ही है। अगर हम Mythological Importance की बात करें तो माना जाता है कि वनवास के दौरान जिस दिन भगवान श्री राम (Lord Shri Rama) अपने छोटे भाई लक्ष्मण (Laxman) के साथ मां शबरी के आश्रम (Maa Shabri Aashram) पहुंचे थे। वह दिन Vasant Panchami का ही दिन था। जहां मां शबरी का आश्रम था वह दंडकारण्य क्षेत्र था जो कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और गुजरात (Gujarat) के बीच के एरिया में आता है। इसलिए इस क्षेत्र के वनवासी आज भी Vasant Panchami के दिन शबरी आश्रम की एक शिला की पूजा करते हैं। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि Lord Rama उस शिला पर बैठे थे।

वहीं अगर Historical Importance की बात की जाए तो इसे दिन युद्ध में 16 बार मोहम्मद गौरी (Muhammad Ghori) को हराने वाले पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) ने मोहम्मद गौरी को मार गिराया था और खुद को भी खत्म कर दिया था। Vasant Panchami का दिन उनकी वीरता और बलिदान की कहानी बतलाता है। इसलिए यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है। वही हिंदी साहित्य के लिए भी Vasant Panchami की महत्वता है। इस दिन हिंदी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का भी जन्म दिवस है। साहित्य के लिहाज से भी बसंत पंचमी का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण।

सरस्वती पूजा के लाभ | Advantages of Saraswati Pooja

  • सरस्वती पूजा के दिन Goddesses Saraswati Puja करने से मनुष्य में व्याख्यान का विकास होता है। वही मां सरस्वती की कृपा से मनुष्य बंदर योनि से इंसान बना है वही मनुष्य में सभ्यता(Sophistication) का भी विकास हुआ है। जो लोग knowledge, Art और Sophistication का विकास चाहते हैं वह सरस्वती मां की पूजा जरूर करें.
  • Goddesses Saraswati की पूजा करने से मन बुद्धिजीवी का भी विकास होता है यानी कि जिस व्यक्ति का मन एकाग्र करते हुए माता के चरणों में स्वयं को समर्पित करता है उसका विकास निश्चित है।
  • मां सरस्वती की पूजा करने से Students को काफी लाभ मिलता है। ऐसा माना जाता है कि जिस विद्यार्थी पर Goddesses Saraswatu की कृपा हो जाए सफलता के शिखर पर पहुंच जाता है
  • Art के क्षेत्र में भी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए और अपनी कला को Development करने के लिए भक्त माता की पूजा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं
  • मां सरस्वती की पूजा Vasant Panchami करने पर माता हर मनुष्य को बुद्धि प्रदान करती है, माता का स्वभाव बहुत ही कोमल है वह बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाती है

FAQ’s Saraswati Puja 2023

Q. सरस्वती पूजा कब की जाती है ?

Ans.वसंत पंचमी के दिन ही सरस्वती पूजा की जाती है.

Q. साल 2023 में सरस्वती पूजा कब है ?

Ans.साल 2023 में सरस्वती पूजा जनवरी 26 को है.

Q. सरस्वती पूजा के दिन लोग कौन से रंग के वस्त्र धारण करते है ?

Ans.सरस्वती पूजा के दिन लोग पीले रंग के वस्त्र धारण कर मां की पूजा करते है.

Q. वसंत पंचमी के दिन ही सरस्वती पूजा क्यो की जाती है ?

Ans.वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि इसी दिन मां सरस्वती की उतपत्ति हुई थी.

Q. सरस्वती पूजा किस दिन आती है ?

Ans.सरस्वती पूजा माघ माह के शुल्क पक्ष की पंचमी पर आती है.

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