Gandhi Jayanti Speech in Hindi | गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में

By | सितम्बर 23, 2022
Gandhi Jayanti Speech in Hindi

Gandhi Jayanti Speech in Hindi:- गांधी जयंती हर साल 2 अक्टूबर को बड़े हर्षोल्लास के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। इस दिन भारत के अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग संस्थानों के द्वारा समारोह आयोजित करवाया जाता है और इस दिन निबंध लेखन और गांधी जयंती पर भाषण (Gandhi Jayanti Speech) जैसी प्रतियोगिता और समारोह किए जाते है। अगर आप भी इस तरह के किसी समारोह का हिस्सा बनना चाहते हैं और गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी के लिए कोई भाषण देना चाहते हैं तो नीचे दी गई जानकारियों को ध्यानपूर्वक पढ़ें। 

महात्मा गांधी भारत के सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। महात्मा गांधी के बलिदान और उनके अतुलनीय कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपिता का ओहदा दिया गया है। अगर आप गांधी जयंती पर भाषण तलाश कर रहे हैं तो इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी नीचे सरल शब्दों में दी गई है उसे ध्यानपूर्वक पढ़ें। 

Gandhi Jayanti Speech in Hindi

जयंती का नामGandhi Jayanti 2022
कब मनाते हैहर साल 2 अक्टूबर को
कैसे मनाते हैपूरे भारतवर्ष में अलग-अलग प्रकार के समारोह से
क्यों मनाते हैमहात्मा गांधी के विचारों का निर्वहन करने के लिए

गांधी जयंती पर भाषण | Gandhi Jayanti Speach

सभी आदरणीय सभा गण को मेरा प्रणाम, आज गांधी जयंती के अति महत्वपूर्ण है दिवस के अवसर पर हम एकत्रित हुए है। मुझे महात्मा गांधी पर दो शब्द कहने के अनुमति देने के लिए आप सब का धन्यवाद।

जैसा कि हम सब जानते है महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले में हुआ था। उनके दादाजी का नाम उत्तमचंद गांधी था जो गुजरात के राजघराने में दीवान का काम करते थे। इसके बाद जब उस इलाके में अंग्रेजों का शासन शुरू हुआ तब महात्मा गांधी के पिता को गुजरात के राजकोट के कोर्ट में दीवान के रूप में ट्रांसफर कर दिया गया था जहां वह कार्य करते थे। महात्मा गांधी कब पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, जिसमें उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था, उनकी माता का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी का विवाह महज 12 वर्ष की आयु में उनसे 1 साल बड़ी 13 वर्ष की कस्तूरबा गांधी से कर दिया गया था। इसके बाद महात्मा गांधी ने राजकोट से अपनी प्रारंभिक शिक्षा को पूर्ण किया और लंदन बैरिस्टर की पढ़ाई करने चले गए थे। 

आज के जमाने में जिस पढ़ाई को हम वकालत की पढ़ाई कहते है उस जमाने में उसे बैरिस्टर की पढ़ाई कहते थे। वहां से वकालत करने के बाद वह भारत आकर अपनी पत्नी के साथ मुंबई में बस गए थे जहां वह एक कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे थे। कुछ सालों तक प्रैक्टिस करने के बाद उन्हें दक्षिण अफ्रीका के एक अमीर सेठ का केस लड़ने का मौका मिला। उस केस के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा और दक्षिण अफ्रीका में हो रहे नस्लभेद को देखकर उन्होंने आंदोलन करने का विचार बनाया। दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन इतना सफल हुआ कि पहली बार भारतीय देश के किसी व्यक्ति के दबाव में आकर अंग्रेज सरकार को अपने कानून में बदलाव करना पड़ा था।

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2 October speech in Hindi

इसके बाद महात्मा गांधी भारत की अखबारों की सुर्खियों में छा गए थे। कुल 21 साल तक महात्मा गांधी अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दक्षिण अफ्रीका में रहे जिसके बाद 9 जनवरी 1915 को भारत वापस लौटे। अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले के निर्देश पर वह भारत आए थे और अंग्रेजों को यहां से भगाने का विचार बना रहे थे। मगर उनके गुरु गोपाल कृष्ण गोखले ने उन्हें सलाह दी कि 1 साल तक भारत को पूरे अच्छे से घूम कर अंग्रेजों की गतिविधि को वहां समझने का प्रयास किया जाए। इसके बाद महात्मा गांधी 1 साल तक भारत भ्रमण करते रहे और अंत में सब कुछ समझने के बाद 1917 में बिहार के चंपारण जिले से अपने आंदोलन को शुरू किया था।

महात्मा गांधी अहिंसा और सत्य के मार्ग पर लोगों को चलने का उपदेश दे रहे थे उनका मानना था कि अगर सत्य की राह पर अहिंसा का पालन करते हुए चलेंगे तो दुनिया की कोई भी शक्ति आपको किसी भी तरह से हरा नहीं कर सकती है। महात्मा गांधी ने अपने पूरे जीवन काल में 8 से अधिक अलग-अलग प्रकार के आंदोलनों में हिस्सा लिया और भारत को अंग्रेजों से मुक्त करवाया। महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च, जैसे अलग-अलग प्रकार के आंदोलनों को पूरे भारतवर्ष में फैला पाए। 

Gandhi Jayanti per bhashan

4 जून 1944 को रेडियो पर सुभाष चंद्र बोस से बात करने के दौरान महात्मा गांधी को पहली बार राष्ट्रपिता की उपाधि सुभाष चंद्र बोस ने दी थी। इसके बाद हमारा देश आजाद हुआ और हर साल 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अहिंसा दिवस गांधी जयंती के रूप में मनाने की परंपरा को शुरू किया गया। महात्मा गांधी को नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया गया था मगर किसी कारणवश उन्हें यह पुरस्कार नहीं दिया गया। महात्मा गांधी का जीवन बहुत ही संघर्ष में रहा उन्होंने अपनी जीवनी द एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ में बताया कि किस प्रकार उन्होंने भारत के एक जगह से बैठकर बिना इंटरनेट और मोबाइल के पूरे भारत के लोगों को संचालित किया और विश्व भर में एक बेहतरीन वक्ता और प्रचलित नेता के रूप में खुद को प्रचारित किया।

हमें महात्मा गांधी सदैव याद रहेंगे उनके अतुलनीय कार्य की वजह से आज हिंदुस्तान आजाद हो पाया है। हम महात्मा गांधी के बलिदान और उनके कार्य कुशलता को कभी नहीं भूल पाएंगे इसीलिए किसी कवि ने कहा है कि 

“दे दी हमे आजादी बिना खड़क बिना ढाल,

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।”

गांधी जयंती पर भाषण हिंदी में

गांधी जयंती का त्यौहार अहिंसा का त्यौहार है जिसे हर साल पूरे भारतवर्ष में बड़े हर्षोल्लास के साथ महात्मा गांधी और उनके विचारों को याद करके मनाया जाता है। गांधी जयंती के त्यौहार को राष्ट्रीय दिवस भी कहा जाता है। इस दिन हम महात्मा गांधी के विचारों का निर्वहन करने का प्रयास करते है, महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी और उनकी माता का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी का विवाह महज 12 वर्ष की आयु में कस्तूरबा गांधी से कर दिया गया था। महात्मा गांधी ने अपने जीवन का 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका में बिताया था। महात्मा गांधी को चार बच्चे थे, जिनका नाम हरिलाल, मणिलाल, रामदास, देवदास, था।

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Gandhi Jayanti speech in Hindi 10 lines

महात्मा गांधी ने अपनी वकालत की पढ़ाई लंदन से पूरी की थी और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्ष तक वकालत का काम किया था जहां उन्होंने आंदोलन करना शुरू किया था और गोपाल कृष्ण गोखले से मिलकर उन्हें अपना राजनीतिक गुरु माना था। 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी सालों बाद भारत आए थे और हमेशा अखबार की सुर्खियों में रहने की वजह से हर किसी को इनसे बहुत उम्मीदें थी। महात्मा गांधी हर किसी के उम्मीदों पर खरा उतर कर दिखा पाए और उन्होंने पूरे भारत भ्रमण के बाद 1917 में अपने सत्याग्रह आंदोलन से आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करना शुरू किया था। महात्मा गांधी अलग-अलग आंदोलनों से भारत को आजाद कराने में सफल रहे थे। उनके अतुल्य साहस और बेहतरीन कार्य के साथ अप्रतिम नेतृत्व कला को देखकर सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में उन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा दिया था।

हम महात्मा गांधी के इस बलिदान को कभी नहीं भूल पाएंगे और साबरमती से आश्रम में रहने वाले उस संत को हमेशा नमन करेंगे जिसने बिना हथियार उठाए हमारे देश को अंग्रेजों से आजाद कर दिया था। उन्होंने अपनी जीवनी द एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ बताया कि किस प्रकार अंग्रेजों से लड़ने के दौरान उन्हें तकलीफ आई और इस तरह उनका समाधान उन्होंने ढूंढा।

महात्मा गांधी को हम उनके सत्य और अहिंसा के विचारों की वजह से काफी सम्मान करते है और उनके विचारों को अपने जीवन में लाने का प्रयास भी करते है। हर साल की तरह इस साल भी गांधी जयंती के अवसर पर हम महात्मा गांधी के विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे और अपने जीवन को बेहतर बनाएंगे। 

गांधी जयंती पर दो शब्द

गांधी जयंती का त्यौहार हर साल पूरे भारतवर्ष में 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह राष्ट्रीय अहिंसा का त्यौहार है। इस दिन महात्मा गांधी के विचारों पर खरा उतरने का प्रयास हर कोई करता है। महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता है उन्हें इस महत्वपूर्ण उपाधि से सुभाष चंद्र बोस ने सम्मानित किया था। महात्मा गांधी का जन्म गुजरात में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था। बचपन से ही महात्मा गांधी में नेतृत्व की एक बेहतरीन कला थी बचपन में ही अलग-अलग खेलों में बेहतरीन रचित हुआ और वक्ता का कार्य किया करते थे। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गुजरात से पूरी करने के बाद वह वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए थे।

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महात्मा गांधी एक दीवान परिवार से ताल्लुक रखते थे जो उस जमाने में काफी रईस परिवार माना जाता था। इसके बावजूद महात्मा गांधी जब अपने जीवन का अधिकांश समय वकालत की नौकरी करने के बाद दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे तो अपने खानदानी रईसयत को देश के नाम कर दिया था। महात्मा गांधी ने अपना सबकुछ देश को निछावर करते हुए पूरे देश में विभिन्न प्रकार के आंदोलन के साथ भ्रमण करना शुरू किया था। पूरे देश को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया और आज उनकी वजह से हम अंग्रेजों से आजाद हो पाए है। महात्मा गांधी के विचारों पर अमल करने के लिए और उनके बताए रास्ते का निर्वाहन करने के लिए हम गांधी जयंती का त्यौहार हर साल मनाते हैं और इसी तरह हर गांधी जयंती का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ महात्मा गांधी को उचित सम्मान देते हुए मनाते रहेंगे।

Gandhi Jayanti Speech in Hindi PDF

गांधी जयंती पर भाषण कैसे दें

गांधी जयंती पर भाषण देने के लिए आपको कुछ खास निर्देशों का आदेश अनुसार पालन करना होगा जिसे नीचे सूचीबद्ध किया गया है – 

  • किसी भी भाषण की शुरुआत सभागण के अभिनंदन से की जाती है इस वजह आपको सबसे पहले सभा में बैठे आदरणीय अतिथि गणों का अभिनंदन करते हुए शुरू करना है।
  • इसके बाद आपको महात्मा गांधी के जन्म और उनके परिचय पर कुछ बताना है।
  • इसके बाद अपने भाषण में आपको गांधी जयंती के त्यौहार के ऊपर कुछ बात बतानी है।
  • अब आपको बताना है कि आखिर महात्मा गांधी इतने महत्वपूर्ण क्यों है और कैसे बने।   
  • अंत में गांधी जयंती का त्यौहार किस प्रकार मनाया जाता है और आने वाले समय में किस प्रकार मनाया जाएगा इस पर विचार विमर्श करते हुए अपने भाषण को खत्म करना है। 

Gandhi Jayanti Speech in Hindi FAQ’s

Q. महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?

महात्मा गांधी का जन्म भारत के गुजरात राज्य के पोरबंदर जिले में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था।

Q. महात्मा गांधी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

गांधी जयंती का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ विभिन्न प्रकार के समारोहों का आयोजन करते हुए मनाया जाता है।

Q. महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का खिताब किसने दिया था?

महात्मा गांधी को 1944 में डॉक्टर सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता का खिताब दिया था। 

निष्कर्ष

आज इस लेख में हमने आपको गांधी जयंती पर भाषण (Gandhi Jayanti Speach) के बारे में बताया है। हमने आपको सरल शब्दों में यह समझाने का प्रयास किया है कि महात्मा गांधी कौन थे और उनके महत्वपूर्ण भाषण किस प्रकार दिया जा सकता है। अगर हमारे द्वारा दी गई जानकारियों को पढ़ने के बाद आप महात्मा गांधी के भाषण के बारे में विस्तारपूर्वक समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें साथियों को सुझाव और विचार कमेंट में बताना ना भूले।

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