बालिका दिवस पर कविता हिंदी में | Balika Diwas Poem in Hindi

By | जनवरी 20, 2023
Balika Diwas Poem

Balika Diwas Poem in Hindi:-लिंग के आधार पर भेदभाव हमारी भारत की बालिकाओं के लिए एक बहुत ही बड़ा मुद्दा है, जो हर Girl ने अपने जीवन में कई बार Experience किया है। बालिकाओं के हक के लिए और उनके द्वारा फेस की जा रही प्रोबलम्स के मद्देनजर हर 24 जनवरी के दिन India में National Girl Child Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एक लड़की के अधिकारों और उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाना है।

इस दिन कई जगाहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। National Girl Child Day के दिन लोगों द्वारा Poems भी बोली जाती है। क्या आप भी बालिकाओं पर आधारित कविता की खोज कर रहे है जो आप बालिका दिवस पर बोलना चाहते है, तो इस लेख से आप मदद ले सकते है।

इस लेख में हमने बालिका दिवस पर कविता ,राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कविता हिंदी में ,balika diwas poem in Hindi ,बालिका दिवस पर अच्छी कविता इन बिंदूओं को जोड़ा है जिससे आपको बालिका दिवस के लिए बहतरीन से बहतरीन कविता उपलब्ध हो सकें। अगर आप कार्यक्रम में अपनी प्रशंसा करवाना चाहते है तो इस लेख में दी गई कविता को जरुर बोले। सोचने पर मजबूर कर देने वाली कविताओं के लिए इस लेख को आखिर तक पढ़े।

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर भाषण हिंदी में

Balika Diwas Poem

टॉपिकबालिका दिवस पर कविता
लेख प्रकारआर्टिकल
साल2023
बालिका दिवस24 जनवरी
आवर्तिसालाना
किसके लिए मनाया जाता हैदेश की बालिकाओं के लिए
बालिका दिवस की शुरुआतसाल 2008
बालिका दिवस पहलमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय
बालिका दिवस 2023 थीमअघोषित

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर कविता हिंदी में | National Girl Child Day

  • बहुत चंचल बहुत खुशनुमा सी होती हैं बेटियाँ

नाजुक सा दिल रखती हैं, मासूम सी होती हैं बेटियाँ

बात बात पर रोती हैं, नादान सी होती हैं बेटियाँ

रहमत से भरभूर खुदा की नेमत हैं बेटियाँ

हर घर महक उठता है, जहाँ मुस्कुराती हैं बेटियाँ

अजीब सी तकलीफ होती हैं, जब दूर जाती हैं बेटियाँ

घर लगता है सूना – सूना पल – पल याद आती हैं बेटियाँ

खुशी की झलक और हर बाबुल की लाड़ली होती हैं बेटियाँ

ये हम नहीं कहते ये तो रब कहता है

कि जब मैं खुश रहता हूँ जो जन्म लेती हैं बेटियाँ |

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दिल के बहलाने का सामान न समझा जाए

मुझ को अब इतना भी आसान न समझा जाए

मैं भी दुनिया की तरह जीने का हक़ माँगती हूँ

इस को ग़द्दारी का एलान न समझा जाए

अब तो बेटे भी चले जाते हैं हो कर रुख़्सत

सिर्फ़ बेटी को ही मेहमान न समझा जाए

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बालिका दिवस पर कविता | Balika Diwas Poem

फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया।

मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया।।
सरगम से लहक उठता मेरा आंगन।

चलने से उसके, जब बजती पायलिया।।
जल तरंग सी छिड़ जाती है।

जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया।।
गद -गद दिल मेरा हो जाये।

बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया।।

कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया।

बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया।।
दफ्तर से जब लौटकर आऊं।

दौड़कर पानी लाती गुड़िया।।

कभी जो मैं, उसकी माँ से लड़ जाऊं।

खूब डांटती नन्ही सी गुड़िया।।
फिर दोनों में सुलह कराती।

प्यारी -प्यारी बातों से गुड़िया।।
मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है।
प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया।।

Balika Divas kavita In Hindi

आने दो इस धरा पे मुझको

नेह भरी निगाह से देख सकूंगी मैं सबको

कसूर क्या है मेरा ये पूछुंगी जग से

भ्रूण हत्या ना करें ये कहूंगी तब जग से
आराध्य से मांगे वरदान

सारे पुण्य व्यर्थ जाएंगे

जब करोगे भ्रूण हत्याएं

सारे जग में कहीं-न कहीं
भ्रूण हत्याओं की हृदय विदारक

खबरें सुन-सुनकर

सिसक रही हूं मैं गर्भ में

मैं तो अभी भ्रूण हूं

किंतु भ्रूण भी तो सीख जाता

अभिमन्यु-सा चक्रव्यूह

भेदने का राज
दुनिया के लोभी चक्रव्यूह

को मैं तोड़ना चाहती हूं

अभी बोल नहीं पाती

लेकिन समझ तो जाती हूं

बेटी हूं तो क्या हुआ

धरा पर आकर

उड़ान भरुंगी नभ में

तैरुंगी गहरे जल में

दौड़ूंगी पथरीले थल में

क्योंकि मुझे भी तो

देश की रक्षा व नाम रोशन करने का हक 

Balika Diwas Par Kavita in Hindi

कोयल की कूक बन जाउंगी
फूलों की खुशबु बन महक जाउंगी

रिश्तों का अर्थ सबको समझाउंगी

जीने का अधिकार

ईश्वर ने दिया सब को

तो भला क्यों मारते हो हमें

बस आने तो दो इस धरा पे मुझको

नेह भरी निगाह से देख सकुंगी मैं सबको

कसूर क्या है मेरा पुछुंगी ये तब जग से

भ्रूण हत्या ना करे ये कहूंगी तब मैं सब से

Balika Diwas Poem in Hindi 

मेहँदी बोली कुमकुम का त्यौहार नहीं होता-

रक्षाबंधन के चन्दन का प्यार नहीं होता-

इसका आँगन एक दम सूना-सूना सा रहता है-

जिसके घर में बेटी का अवतार नहीं होता-

जिस धरती पर से मात्र शक्ति का मान नहीं जा सकता है-

नर के नारी से सम्मान नहीं जा सकता है-

बेटा घर में हो तो बेशक सीना ठंडा रह जाये-

बेटी घर में हो तो भूखा मेहमान नहीं जा सकता…

बालिका दिवस पर कविता | Balika Diwas Poem

चांद की चांदनी ले

सूरज की आभा से दमकी

तारोँ की छाँव मेँ

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अभी तो उतरी थी

बीज बन वो नन्हीँ परी

एक माँ की कोख मेँ !

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बीज था वो मानव की उत्पत्ति का

बीज था वो ममता की गंगा का

बीज था वो स्नेह के झरने का

बीज था वो त्याग और बलिदान का

धरती पर मानव के उत्थान का !
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माँ ने सींचा था उसे अपने ही रक्त मेँ

महसूस किया था स्पंदन जब अपने वजूद मेँ

कितने ही सपने बुन डाले थे पल मेँ

कितने ही रूपोँ मेँ रच लिया था क्षण मेँ

माँ के लिये वो ना नर था ना मादा थी

नर था तो कन्हैया था, मादा थी तो लक्ष्मी थी

गर था तो सिर्फ नव जीवन का एक एहसास वो !

Girl Child Day Par Kavita

कितनी ही बातेँ उससे कर डालीँ थी उसने

कितनी ही बार उसको सहलाया था कोख मेँ

प्यार के पराग से उसे भिगोया था उसने

तभी एक तूफान आया कहीँ से

पूछ बैठा उसकी पहचान को वो

एक माँ की कोख से ही जनमा था जो

कर बैठा नफरत एक माँ की कोख से ही

जनम लेने न पाये कोई कोख दूसरी

उजाड़ दी वो कोख खिलने से पहले ही !
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पूछे तो कोई इन नादान हत्यारोँ से

चुकाते हैँ ऋण क्या जनमदात्री का ऐसे ही

कौन सुनेगा पुकार उस माँ की

नारी ही बन जाये जब दुश्मन नारी की !

सिसक पड़ी वो माँ सुन चीख

कोख मेँ उस अजन्मी परी की

देखी न गई दुर्दशा माँ से

नोच कर कुचली गई कली की

मरती रही है ममता उस माँ की

जब जब पनपी कोख मेँ देह नारी की

कितनी बार चढ़ेगी वो माँ सूली पर

संवेदनहीन समाज के इस विष वृक्ष की !

कैसे खिलेंगे गुलाब उस चमन मेँ

बो रखे है जहाँ बीज बिनौले

Balika Divas Poem

घर की जान होती हैं बेटियाँ,

पिता का गुमान होती हैं बेटियाँ,

ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियाँ,

यूँ समझ लो कि बेमिसाल होती हैं बेटियाँ.

बेटो से ज्यादा वफादार होती हैं बेटियाँ,

माँ के कामों में मददगार होती हैं बेटियाँ,

माँ-बाप के दुःखको समझे, इतनी समझदार होती हैं बेटियाँ,

असीम प्यार पाने की हकदार होती हैं बेटियाँ.

बेटियों की आँखे कभी नम ना होने देना,

जिन्दगी में उनकी खुशियाँ कम ना होने देना,

बेटियों को हमेशा हौसला देना, गम ना होने देना,

बेटा-बेटी में फर्क होता हैं, ख़ुद को ये भ्रम ना होने देना.

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कन्या भ्रूण का हो क्यों हनन?

इस पर थोड़ा करो मनन!

जीव का है जीवन अधिकार

फिर क्यों उस पर अत्याचार?

जननी जन्मदायिनी कन्या,

इससे चलता है संसार,

नाम हो कुल का बेटे से,

तो वंश पनपता बेटी से,

बेटी बिना है सूना जीवन,

बिन चिडि़या के जैसे आँगन,

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बिन खुशबू के चंदन काठ,

कन्या भ्रूण पर कुठाराघात,

है समाज का घोर कलंक,

भर लो उसको अपने अंक।

बालिका दिवस पर अच्छी कविता | Good poem On Girl’s Day

लाड़ली बेटी जब से स्कूल जाने हैं लगी,
हर खर्चे के कई ब्योरे माँ को समझाने लगी.

फूल सी कोमले और ओस की नाजुक लड़ी,
रिश्तों की पगडंडियों पर रोज मुस्काने लगी.

एक की शिक्षा ने कई कर दिए रोशन चिराग,
दो-दो कुलों की मर्यादा बखूबी निभाने लगी.

बोझ समझी जाती थी जो कल तलक सबके लिए,
घर की हर बाधा को हुनर से वहीं सुलझाने लगी.

आज तक वंचित रही थी घर में ही हक के लिए,
संस्कारों की धरोहर बेटों को बतलाने लगी.

वो सयानी क्या हुई कि बाबुल के कंधे झुके,
उन्हीं कन्धों पर गर्व का परचम लहराने लगी.

पढ़-लिखकर रोजगार करती, हाथ पीले कर चली,
बेटी न बेटों से कम, ये बात सबको समझ में आने लगी.

कहती है एक लड़की जमाने की ये कहानी

जन्म लड़की का मिला है यही है उसकी नादानी

सभी कहते है ये उससे तेरी मुस्कान बड़ी सुदंर

मगर ये रीत कैसी है वो बाहर हसँ नही सकती।

है वो सपनो की दुनिया मे है चाहत चाँद छूने की

जमाने की ये हरकतें है बेड़ी उसकी राह की

कुछ कहते हैं, लड़की है कहाँ जायेगी ये अकेली

कोई कहता है दुनिया है नही बाहर निकलने की।

कोई कहता संभल चलना तू इज्जत है दो घरो की

घर वाले सभी कहते राजकुमारी है हमारी

कोई कहता के नाजुक सी कली मेरे घरौदे की

मगर ये है कली कैसी जो कभी खिल नही सकती।

Balika Divas Poem In Hindi

सबसे महान होती हैं भारत की बेटियां
हम सबकी शान होती हैं भारत की बेटियां।

            जिस दिन से घर में आती हैं बेटियां,

            माता-पिता की इज्जत बन जाती हैं बेटियां।

            भारत के विकास की डोर थामे हैं बेटियां

            भारत को बुलंदियों पर पहुंचातीं बेटियां।

           सीता, सावित्री, दुर्गा की प्रतिरूप हैं बेटियां,

           लक्ष्मी, सरस्वती, राधा का रूप हैं बेटियां।

           हर युग में भारत को नई दिशा देती हैं बेटियां,

           त्याग और बलिदान से भरपूर हैं बेटियां।

           रण में चंडी दुर्गा, लक्ष्मी, अहिल्या होती हैं बेटियां,

           आसमान में कल्पना, सुनीता-सी तैरती हैं बेटियां।

           खेल में उषा, मल्लेश्वरी, सिन्धु-सी मचलती हैं बेटियां,

           बछेंद्री, सानिया, मिताली-सी उछलती हैं बेटियां।

           विजया, इन्द्रा, सुषमा-सी चमकती हैं बेटियां,

           प्रशासन में किरण बेदी-सी कड़कती हैं बेटियां।

           मैत्रेयी, गार्गी-सी विद्वान होती हैं बेटियां,

           महादेवी, अमृता-सी साहित्यिक होती हैं बेटियां।

           हर क्षेत्र में लक्ष्य को भेदती हैं बेटियां,

           जीवन की चुनौती को जीतती हैं बेटियां।

           भारत का सम्मान होती हैं बेटियां,

           मां-बाप का अभिमान होती हैं बेटियां।

           मरने से नहीं डरती हैं भारत की बेटियां,

           पीछे मुड़कर नहीं देखती हैं भारत की बेटियां।

 FAQ’s Balika Diwas Poem in Hindi

Q. राष्ट्रीय बालिका दिवस क्या है? 

Ans. राष्ट्रीय बालिका दिवस महिला और बाल विकास मंत्रालय की एक पहल है जो लिंग असमानता के कारण भारत में लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है।

Q. राष्ट्रीय बालिका दिवस कब है?

Ans. 24 जनवरी को हर साल भारत में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

Q. सबसे पहला राष्ट्रीय बालिका दिवस कब मनाया गया था?

Ans. साल 2008 में सबसे पहला राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया था।

Q. राष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य लक्ष्य क्या है?

Ans. देश में लड़कियों द्वारा फेस करने वाली असमानताओं को दूर करने के साथ-साथ सभी को बालिकाओं के अधिकारों के बारे में शिक्षित करना राष्ट्रीय बालिका दिवस का मुख्य लक्ष्य है।

Q. राष्ट्रीय बालिका दिवस किसकी पहल है?

Ans. महिला एवं बाल विकास द्वारा की गई पहल के चलते हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

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