Makar Sankranti Vahan 2023 | मकर संक्रांति वाहन क्या है? | 2023 में सूर्य का वाहन कौन होगा?

By | जनवरी 10, 2023
Makar Sankranti Vahan

Makar Sankranti Vahan 2023:- मकर संक्रांति (Makar sankranti) का त्योहार पूरे देश में बडे ही धूमधाम से मनाया जाता है । 2023 में संक्रांति का त्योहार(sankranti festival) जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की तरफ आते हैं, तब सूर्य भगवान मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करते हैं। यह उत्तरायण होने का पर्व है। संक्रांति हर महीने आती है, क्योंकि सूर्य हर माह राशि बदलता है। जब सूर्य के धनु एवं मीन राशि में गोचर से खरमास का प्रारंभ होता है, जिसे मलमास भी कहते हैं। इसी प्रकार जब सूर्य मकर राशि में गोचर करते हैं, तब इसे मकर संक्रांति कहते हैं।

हर साल की संक्रांति विशेष ग्रह-नक्षत्रों और आयुध एवं वाहनों से युक्त होती है। सभी का फल अलग-अलग माना गया है। ऐसे ही कई रहस्यों से भरा हुआ है ये लेख, इसमें हम आपको मकर संक्रांति वाहन क्या है,Makar sankranti Vahan 2023,मकर संक्रांति वाहन का राज,मकर संक्रांति पर सूर्य देव का वाहन क्या है इन सब के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

ज्योतिषाचार्य पं. प्रशान्त मिश्रा का कहना है कि इस बार 14 जनवरी 2023 को रात 8 बजकर  57 मिनट पर सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करेगा। हिंदू धर्म के अनुसार उदयातिथि में ही पर्व मनाया जाता है, इसलिए 15 जनवरी को संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस बार पड़ने वाली मकर संक्रांति का वाहन ‘वाराह’ और उपवाहन ‘वृषभ’ है। इस बार संक्रांति का आगमन हरित वस्त्र, हरित कंचुकी, मोती की माला, बकुल पुष्प (सफेद फूल) धारणइ किए वृध्दावस्था में चंदन लेपन कर खड्ग लिए ताम्रपक्ष में भिक्षा अन्न ग्रहण करते पश्चिमाभिमुख उत्तर दिशा की ओर गमन करते हो रहा है। 

मिश्रा जी के मुताबिक मकर संक्रांति का आगमन दक्षिण दिशा से वाराह वाहन पर सवार होगा, जिसका मतलब इस साल कृषि का उत्पादन भरपूर होगा। संक्रांति का गमन उत्तर दिशा की ओर होगा, यानी यह उत्तर भारत के लिए विशेष शुभफलदायी होगा। यह संकेत राजनेताओं, शासकवर्ग और व्यापारियों के लाभ की ओर भी इशारा करता है। खाद्य पदार्थों के मंहगे होने की आशंका है, इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और ब्राम्हणों को भी कष्ट की आशंका है। 

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Makar Sankranti Vahan 2023

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मकर संक्रांति वाहन का राज | Makar Sankranti 2023 Vahan

मकर संक्रांति में वाहनों का विशेष महत्व बताया गया है। इसी के माध्यम से यह पता चलता है, कि किस राशि के लिए इस बार कौन सा फल मिलेगा। किसे साल भर फायदा और किसे नुकसान होने की आशंका होती है। जब सूर्य भगवान दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के इस गोचर को ही संक्रांति कहा जाता है। मतलब 12 राशियों के हिसाब से सूर्य देवता हर महीने एक राशि में भ्रमण करते हैं और उनके वाहन भी अलग-अलग होते हैं। पंडितों के अनुसार सूर्य देवता के यह वाहन हर साल बदलते रहते हैं। संक्रांति का यह वाहन कभी शेर, बैल, सुअर तो कभी भैंस होती है। इस तरह हर बार वाहन अलग होते हैं। पिछले साल सूर्य देवता का वाहन ‘बाघ’ था।

इस बार मकर संक्रांति पर सूर्यदेव का वाहन

इस बार संक्रांति (sankranti)पर सूर्य देवता का वाहन “वाराह (सूअर)” है। वर्तमान में सूर्य देवता धनु राशि में हैं, जो कि खरमास या मलमास कहा जाता है। सूर्य की इस स्थिति को कई जगह पर “धनारसें” भी बोला जाता है। धनु राशि में जब सूर्य आते हैं तो सारे शुभ काम बंद हो जाते हैं। इसके बाद सूर्य “संक्रांति” के दिन मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे शुभ मुहूर्त कहा जाता है। सारे शुभ काम हवन, विवाह आदि की शुरूआत हो जाती है। सूर्य के अलग-अलग राशियों में प्रवेश करने पर जातकों पर इसका प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होता है। उत्तरायण (uttarayan) होने के बाद से ठंड भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। उत्तराखंड में इस पर्व पर उत्तरायणी मेले का भी आयोजन किया जाता है। आमतौर पर सर्दी में रात लबी और दिन छोटा है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन से रात छोटी और दिन बड़ा होने लगता है। 

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टॉपिकमकर संक्रांति वाहन क्या है
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2023 मकर संक्रांति कब है15 जनवरी
साल 2023 में मकर संक्रांति वाहन क्या हैवाराह
साल 2023 में कब सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करेंगे14 जनवरी 2023 को रात 8 बजकर  57 मिनट पर सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करेंगे
किसकी पूजा की जाती हैसूर्य देव

मकर संक्रांति पर स्नान व दान

ज्योतिषियों के मुताबिक मकर संक्रांति को सुबह काले तिल का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। इसे “बुढ़की” लेना भी कहते हैं। इसके अलावा तिल से बनी चीजों का दान करना चाहिए। गरीबों को कंबल और वस्त्र भी दान करना चाहिए। कई श्रध्दालु इस दिन नदियों में स्नान करने जाते हैं और डुबकी लगाकर भगवान सूर्यनारायण (Sun) को अर्घ देते हैं। मकर संक्रांति साल का पहला बड़ा पर्व होता है।

ऐसे हुई संक्रांति पर खिचड़ी खाने की शुरूआत

कहा जाता है कि खिलजी से युध्द के दौरान नाथ योगी बहुत कमजोर हो गए और भूख की वजह से सबकी तबियत बिगड़ने लगी। ऐसे में गोरखनाथ (Gorakhnath) ने दाल-चावल और सब्जी को एक साथ पकाकर सभी को भोजन कराया। इससे नाथ योगियों को ऊर्जा मिली और उनकी सेहत में भी सुधार हुआ। कहा जाता है कि तभी से खिचड़ी बनाने की परंपरा चली आ रही है।

मकर संक्रांति के दिन जो खिचड़ी बनाई जाती है, उसका संबंध किसी न किसी ग्रह से जरूर होता है। खिचड़ी में इस्तेमाल होने वाले चावल का संबंध चंद्रमा से, उड़द की दाल का संबंध शनिदेव (Shanidev) से, हल्दी का संबंध गुरू और हरी सब्जियों का संबंध बुध देव से होता है। इसके अलावा घी का संबंध सूर्य देव से होता है। इसलिए मकर संक्रांति (Makar sankranti) की खिचड़ी को बहुत खास माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अगर किसी पंडित को खिचड़ी खिलाई जाए तो, उस इंसान के घर में सुख, समृध्दि और सकारात्मक ऊर्जी का संचार होता है।

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इस दिन दान में दाल, चावल, तिल, हल्दी, नमक, हरी सब्जियां का दान करना शुभ माना जाता है। खिचड़ी खाने से स्वास्थ्य (Health) भी अच्छा रहता है। इसके सेवन से कई बीमारियां भाग जाती हैं। इस पर्व के अवसर पर लोगों के घर में तरह-तरह के पकवान भी बनाए जाते हैं, जिनमें तिल, आटा, सूजी, लाई, बेसन के लड्डू के अलावा पपड़ी और गुजिया जैसे पकवान बनते हैं और संक्रांति के स्नान के बाद भगवान को भोग लगाकर लोग यह पकवान खाते हैं। लड्डुओं में गुण का उपयोग किया जाता है, जो काफी फायदेमंद होता है।

FAQ’s Makar Sankranti Vahan 2023

Q.  2023 में मकर संक्रांति मनाई जाएगी ?

Ans. 15 जनवरी को साल 2023 की मकर संक्रांति धूमधाम से मनाई जाएगी । 

Q.  2023 में मकर संक्रांति का वाहन क्या है?

Ans. साल 2023 में मकर संक्रांति का वाहन वाराह (सुअर) है ।

Q.  मकर संक्रांति पर सूर्य किस राशि में प्रवेश करते है?

Asn. मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है ।

Q.  मकर संक्रांति पर सूर्य किस ओर वक्री होते हैं?

Asn. मकर संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण ओर वक्री होते है। 

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