महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में | Mahashivratri Essay in Hindi | Shivratri Nibandh PDF 2023

2023 में महाशिवरात्रि 18 फरवरी 2023 को मनाई जा रही हैं। यदि आपकी तलाश महाशिवरात्रि पर निबंध को लेकर हैं तो दी गई Mahashivratri Essay in Hindi PDF को डाउनलोड कर ले।
By | फ़रवरी 7, 2023
Mahashivratri Essay in Hindi

Mahashivratri Essay in Hindi:- हमारा देश भारत त्योहारों का देश है। यहां होली, दिवाली, दशहरा, पोंगल, महाशिवरात्रि, क्रिसमस, ईद आदि जैसे कई त्योहार मनाए जाते हैं। हम इन सभी त्योहारों को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि महाशिवरात्रि इस साल 18 फरवरी को पड़ रही है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की रात यानी अमावस्या से एक दिन पहले मनाया जाता है।ऐसा माना जाता है कि इसी दिन सृष्टि का आरंभ हुआ था। इसी दिन भगवान शिव प्रजापिता ब्रह्मा के शरीर से भगवान रुद्र  के रूप में प्रकट हुए थे और इस महाशिवरात्रि (हिंदी में महाशिवरात्रि पर निबंध) पर भगवान शिव ने तांडव नृत्य करके तीसरे नेत्र का प्रदर्शन किया था। वहीं ये भी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था। इन सभी कारणों से हिंदू शास्त्रों में महाशिवरात्रि की रात का बहुत महत्व है। इस लेख में हम आपको महाशिवरात्रि पर निबंध प्रस्तुत करेंगे। इस लेख में महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में (mahashivratri essay) maha shivratri essay in Hindi, Mahashivratri par Nibandh, महाशिवरात्रि पर 10 लाइन जैसे बिंदूओं पर चर्चा करेंगे। 

Mahashivratri Essay in Hindi

टॉपिकमहाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में
लेख प्रकारनिबंध
साल2023
साल 2023 में महाशिवरात्रि कब है18 फरवरी
महाशिवरात्रि के दिन किस की पूजा होती हैभगवान शिव
भगवान शिव की पत्नी का नाममाता पार्वती
महाशिवरात्रि कब आती हैफाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी की रात
हिंदूओं के तीन बड़े देव कौन से हैब्रह्मा, विष्णु, महेश

महाशिवरात्रि क्या है? 

भारतवर्ष में हिंदुओं के तैतीस कोटि (प्रकार) देवी-देवता हैं, जिन्हें वे मानते और पूजते हैं, लेकिन उनमें से प्रमुख स्थान भगवान शिव(shiva) का है। वैसे तो शिवरात्रि (Shivratri) का त्योहार महीने में दो बार आता है, जिसे हम चतुर्दशी के नाम से जानते हैं, लेकिन “महाशिवरात्रि”( Mahashivratri) साल में एक बार ही पड़ती है। 2023 में “महाशिवरात्रि” 18 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान भोलेनाथ का विवाह बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। पुराणों में कहा गया है कि “हर अनंत, हरि कथा अनंता”, मतलब परमात्मा अनंत है, उसकी ना तो शुरुआत समझ में आती है और ना ही अंत। ऐसे ही भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है, जिनमें कुछ प्रमुख नाम भोलेनाथ, शंकर, महादेश, नर्मदेश्वर, महाकालेश्वर(Mahakaleshwar, ujjain), जटाशंकर, भीमशंकर और भी कई हैं। भगवान शिव को मानने वालों ने शैव नामक संप्रदाय चलाया। शैव संप्रदाय के अधिष्ठाता एवं प्रमुख देवता भगवान शिव है। इस संप्रदाय के लोग नियमित शिव की उपासना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि कोई भी देवता इतनी जल्दी खुश नहीं होते, जितनी जल्दी भगवान शिव होते हैं। 

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महाशिवरात्रि पर निबंध हिंदी में | Maha Shivratri Essay in Hindi

कैसे आया ‘शिवरात्रि’ का नाम – शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव सभी जीव-जंतुओं के स्वामी एवं अधिनायक है। भगवान शंकर साल में छह महीने कैलाश पर्वत पर रहकर तपस्या में लीन रहते हैं। उनके साथ ही सभी कीड़े-मकोड़े भी अपने बिलों में बंद हो जाते हैं। उसके छह महीने बाद भगवान कैलाश पर्वत से उतरकर धरती पर श्मशान घाट में निवास करते हैं। इनके धरती पर अवतरण फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ करता है। इसी दिन को “महाशिवरात्रि” के नाम से जाना जाता है। इस दिन “ओम नम: शिवाय” (Om namah shivay) का जाप करना शुभ माना जाता है। 

शिवरात्रि का महत्व 

‘महाशिवरात्रि’ के दिन शिवालयों में काफी तादात में भक्तों की भीड़ होती है। कई जगह तो इस दिन मेले का आयोजन भी होता है। पूरे भारत में यह पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिरों में इस दिन फूलों से सजावट होती है। भक्तगण सारा दिन बिना भोजन के व्रत-उपवास करते हैं। मंदिरों में सुबह से ही पूजन का क्रम चलने लगता है। अपनी सुविधा के मुताबिक सायंकाल में भक्त फल, बेर, दूध, दही और अन्य सामग्रियों को लेकर मंदिर जाते हैं और भगवान को अर्पण करते हैं। मंदिर में शिवलिंग को जल और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। ऐसा करना पुण्यदायक माना जाता है। इसके साथ ही भगवान शिव के वाहन नंदी की भी इस रात बड़ी पूजा व सेवा की जाती है। मंदिरों में भजन और “शिव विवाह” का आयोजन किया जाता है। भगवान “शिव” को पालकी में बिठाकर उनकी नगर परिक्रमा भी कराई जाती है।

गंगा-स्नान का महत्व | Importance of Ganga-bathing

“महाशिवरात्रि” के दिन गंगा-स्नान का भी विशेष महत्व है। इस दिन ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने गंगा (ganga) के तेज प्रवाह को अपनी जटाओं में धारण करके इस मृत्युलोक के उध्दार के लिए धीरे-धीरे धरती पर छोड़ा था। इसलिए “गंगा-स्नान” करना इस दिन काफी अच्छा माना जाता है। जो लोग “गंगा” जी में डुबकी लगाने नहीं जा पाते वे लोग नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं और गंगाजल का पान भी करना चाहिए। 

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शिवरात्रि की कथा के बारे में 

पूर्वकाल में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था। शिकार करके वो अपने परिवार को चलाता था। वो एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर नहीं चुका सका, साहूकार ने गुस्सा में शिकारी को एक बार पकड़ लिया और शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी, शिकारी बहुत ही ध्यान से शिव से जुड़ी सभी धार्मिक बातें सुन रहा था। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत कथा भी सुनी । शाम के वक्त साहूकार ने उस शिकारी को पास बुलाया और ऋण चुकाने के बारे में पूछा, तब शिकारी ने अगले दिन ऋण चुकाने का वादा किया, जिसके बाद साहूकार ने उसे छोड़ दिया । 

फिर दूसरे दिन अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार करने निकला, लेकिन दिनभर बंदी रहने की वजह से उसे भूख-प्यास लगने लगी। शिकार खोजते हुए वह जब दूर जंगल में गया और अंधेरा होने पर रात जंगल में ही गुजारने के बारे में सोचा। तभी उसे तालाब के किनारे एक बेल का पेड़ दिखा । वह पेड़ पर चड़कर रात बिताने का इंतजार करने लगा। बेल के पेड़ के नीचे ही शिवलिंग था, जो बेलपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को उसका पता भी नहीं चला कि पड़ाव बनाते वक्त उसने जो टहनियां तोड़ी थी वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई । इस प्रकार दिन भर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चड़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर तालाब के पास एक हिरण आई, शिकारी ने अपना बाण उठाया और तीर खींचा, कि हिरणी ने कहा रुक जाओ मैं गर्भवती हूं। तुम एक नहीं दो जान लोगे तुम्हें पाप लगेगा, तो शिकारी ने उसे छोड़ दिया और वाण अंदर करते वक्त कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार शिकारी की पहली पहर की पूजा हो गई। 

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Mahashivratri Par Nibandh PDF

थोड़ी देर बाद फिर एक हिरण आयी तब फिर शिकारी ने अपना वाण तान दिया इस बार हिरणी ने कहगा मैं अपने पति से मिलकर अभी आती हूं। तब तू मुझे मार देना शिकारी फिर वाण अंदर करते वक्त कुछ बेल पत्र फिर शिवलिंग पर गिर गए। शिकारी की दूसरे पहर की पूजा हो गयी। इस प्रकार शिकारी की तीनों पहर की पूजा हो गयी सीथ ही जागरण भी हो गया । उसके इस तरह शिव जी पूजा से मोक्ष प्राप्त हुआ और जब उसकी मौत हुई तो उसे यमलोक ले जाया जा रहा था कि शिवगणों ने उसे शिवलोक भेज दिया। शिव जी की कृपा से अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म की याद रख पाया तथा “महाशिवरात्रि” का पूजन करके उसका अलगे जन्म में भी पालन कर पाया। 

कथा का सार – कथा के अनुसार भगवान महादेव तो अनजाने में किए गए व्रत का भी फल देते हैं। मन में दया भाव होना जरूरी है। रैदास ने कहा है कि “मन चंगा तो कठौती में गंगा”। भोलेनाथ आप सभी की मनोकामना पूरी करे। बोलो गौरीशंकर भगवान की जय।।। 

महाशिवरात्रि निबंध PDF डाउनलोड करें।

महाशिवरात्रि पर 10 लाइन 

  1. जो भी भक्त “महाशिवरात्रि” के दिन पूरे भाव से व्रत रहकर पूजा करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है। 
  2. महादेव को देवों का भी देवता कहा गया है। इस दिन सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में उठकर स्नान करके व्रत को रखकर जितना हो सके “ओम नम: शिवाय” का जाप करना चाहिए। 
  3. मन में पवित्रता बनाए रखें, किसी से झगड़ा नहीं करें।
  4. भगवान को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए।
  5. शिवलिंग की शोडषोपचार पूजन करना चाहिए।
  6. जिसका मन स्थायी नहीं रहता है और किसी एक काम में मन नहीं लगता वे लोग इस दिन अभिषेक जरूर करें।
  7. रुद्राक्ष या तुलसी की माला से जाप करें।
  8. शिवरात्रि के दिन पूरी रात सीधी कमर करके बैठना चाहिए।
  9. किसी गरीब को भोजन जरूर कराएं और दान देवें।
  10. भगवान को धतूर फल, भांग, गांजा का प्रसाद चढ़ावें।   

 FAQ’s Mahashivratri Essay in Hindi

Q. महाशिवरात्रि का त्योहार कब मनाया जाता है?

Ans. फाल्गुन मास की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है ।

Q. महाशिवरात्रि का त्योहार 2023 में कब मनाया जाएगा ?

Ans. 18 फरवरी को महाशिवरात्रि का त्योहार 2023 में मनाया जाएगा।

Q. महाशिवरात्रि के दिन क्या होता है?

Ans. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा होती है।

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